बिस्मिल्लाह क्यू? पढ़ना चाहिए और इसे पढ़ने के क्या फायदे हैं

बिस्मिल्लाह क्यू पढ़ना चाहिए और इसे पढ़ने के क्या फायदे हैं आए जानते

(बिस्मिल्लाह) अक्सर आपने काफ़ी लोगो को इस शब्द का प्रयोग करते देखा होगा। तो आखीर यह शब्द इतना क्यों कहा जाता है

दोस्तो, आप जानते हैं कि हम किसी कार्य को करने के लिए कितनी मेहनत करते हैं
और हमारे काम का नतीजा हमें मालूम ही नहीं है कि क्या होने वाला है

क्योंकि भविष्य ईश्वर के सिवा किसी को नहीं पता हर इंसान चाहता है कि उसका काम सफल हो,

इसलिए हम अपने काम को सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत और तरह-तरह के प्रयास करते हैं

लेकिन हम आस्था से जुड़ी कुछ जरूरी चीजें भूल जाते हैं

अक्सर आपने देखा होगा कि जब भी कोई मुसलमान किसी कार्य को करता है

तो वह बिस्मिल्लाह कहता है बिस्मिल्लाह इस्लाम मैं काफी लिए जाने वाला शब्द है।

जेसे कि कोई व्यक्ति अपने काम पर जाता है तो काम शुरू करने से पहले बिस्मिल्लाह कहता है पानी पीता है तब बिस्मिल्लाह कहता है खाना खाता है

तब बिस्मिल्लाह कहता है दरवाजा खोलता है तब बिस्मिल्लाह कहता है

यात्रा के दोरान बिस्मिल्लाह कहते हैं, पढ़ने से पहले बिस्मिल्लाह कहते हैं, किसी चीज़ को चुनने से पहले छुने से पहले बिस्मिल्लाह कहते हैं,

यहि नही इस्लाम में और भी काफ़ी सारी जगह बिस्मिल्लाह केहने का आदेश हैं

आख़िर आप सोच रहे होंगे कि ज़्यादातर सब जगह ही बिस्मिल्लाह कहा जाता है तो आख़िर बिस्मिल्लाह का अर्थ क्या है और इसे इतना महत्व क्यों दिया गया है आपके मन में सबसे पहले तो ये सवाल होगा कि आखिर बिस्मिल्लाह का मतलब क्या है?

तो आइए जानें कि बिस्मिल्लाह क्यों कहा जाता है

तो बिस्मिल्लाह का मतलब है (शुरू करता हूं अल्लाह के नाम से ) यानी ईश्वर के नाम से

अपना कोई भी कार्य करने से से पहले बिस्मिल्लाह कहे जाने से हमें अल्लाह की मदद मिलती है यानि उसका नाम लेना।

बिस्मिल्लाह कह कर कोई भी कार्य शुरू करने से हमारा काम मे अल्लाह की मदद शामिल हो जाती है

जो बुरी नजर से बचने के लिए होता है और उसे हमारा काम आसान हो जाता।

ईश्वर यानि अल्लाह का नाम लेकर शुरू करने से कोई भी काम हो वो आपके लिए आसान हो जाता है।

क्या है फायदे ?

खाने से लेकर सोने तक और भी काफी तरह के फायदे होते हैं अब आपके मन में एक सवाल और होगा कि आखिर बिस्मिल्लाह ही क्यों।

इस्लाम धर्म के अनुसर ईश्वर एक है यानी अल्लाह है और उसके सिवा कोई माबूद नहीं है

यानी इस्लाम में अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करना शिर्क है इसलिए सिर्फ अल्लाह का नाम लिया जाता है।

बिस्मिल्लाह कहने के और भी कई फ़ायदे हैं आपने सुना होगा बिस्मिल्लाह के आगे और शब्दों का प्रयोग किया जाता है

जेसे कि (बिस्मिल्लाह-हिर्रहमा-निर्रहीम) इसका अर्थ है (शुरू करता हूं अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहेरबान बड़ा बक्शने वाला है

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमा-निर्रहीम

और इसे पहले आपने कुछ और शब्द भी सुने होंगे।

जेसे की ( आउज़ुबिल्लाहि मिनशईतान निर्रजिम‌ बिस्मिल्लाह-हिर्रहमा-निर्रहीम )

इस्का अर्थ है ( मैं अल्लाह की पनाह चाहता हूं शैतान मर्दूद से
शुरू करता हूं अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहेरबान बड़ा बक्शने वाला है )

इस्लाम धर्म के अनुसार आप इस शब्द का प्रयोग करते हैं तो आप अपने काम में सफल होंगे।

तो आशा आपको आपके सवालों के जवाब मिल गया होगा।

बिस्मिल्लाह क्यू पढ़ना चाहिए और इसे पढ़ने के क्या फायदे ।

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